ALL RIGHTS RESERVED

DMCA.com Protection Status

सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Translate

रफ्ता रफ्ता ही

रफ्ता रफ्ता ही कोई होशियारी नहीं, होशियार होना, मुश्किल होता है जिम्मेदार बनना। माँ-बाप की आँखों में देखें तो मुश्किल लगता है उनकी परेशानियों का हिस्सेदार बनना। यूँ तो आसान है नादान बनना, मुश्किल है जिम्मेदार बनना। परिस्थितियाँ भी चाहती होंगी जग में एक बदलाव लाना, हमारी इच्छाएँ बाज़ की तर…

अल्फ़ाज़ हैं लेकिन खामोश है

अल्फ़ाज़ हैं लेकिन खामोश है किताब की तरह है उनकी कहानी, अल्फ़ाज़ हैं लेकिन खामोश है। हर पन्ने पर दर्द की स्याही है, मगर हर लफ़्ज़ में सब्र की जोश है। न जाने ज़िंदगी में कितने पन्ने उन्होंने ख़ुद ही सवारे, निखारे हैं, पर आज बाहर चारपाई पर बैठे भीड़ में रहकर भी तन्हा हारे हैं। ख़ैरियत के वा…

हुनर: नये उड़ान की शुरुआत

हुनर: नये उड़ान की शुरुआत तू लड़ उन  आंधियों  से यही हुनर कल काम आएगा सब्र कर परेशान न हो ये इम्तिहान का वक्त है देखना कल का सूरज एक नई किरण के साथ आएगा तू पूछ उस गिरती बारिश से उनका भी तजुर्बा तेरे काम आएगा जिनके द्रव्यमान हल्के न हो फिर भी बादलों में तैर दिखाया है देखना कल ये हुनर नए पंख…

पलायन करते पक्षी

पलायन करते पक्षी जब मेरी लहरों के साथ तेरी स्वर-लहर गूंजती थी भर चारो तरफ खुशहाली सबको मंत्रमुग्ध कर देती थी अब सुनी पड़ गई ये ललचाती लहरे वीरान जगहों में भी तुझे बुलाती है लहरें आकर इस धारा में फिर से सैर करना तू आकर मेरी जल से फिर अपनी प्यास बुझाना तू अब तुम कहा चले गए कमी खलती है तुम्ह…

मन में दुविधा मत रखो

मन में दुविधा मत रखो जो करना है वो करो मन में दुविधा मत रखो हर तुद परिस्थितियों में हसो बस मन में दुविधा मत रखो तुम नवोदय के बीज हो गर मिट्टी में लिपटोगे नहीं तो खिलोगे कैसे  अपनी खुशबूओ से जग में महकोगे कैसे ये खुला नभ तुम्हारा है जो करना है वो करो बस मन में दुविधा मत रखो             - …

थोड़ा बहुत कविता

थोड़ा बहुत हैरान होने की बात नहीं थोड़ा बहुत तो हम भी लिख लिया करते है आदा की गई किसी के वफाओं को हम भी पन्ने पर उतार लिया करते है सुना इश्क़ में ये गवारा नहीं लहज़ा अपनी अल्फाजों में किसी को बदनाम नहीं किया करते कुछ बाते छिपाकर  कुछ बाते को ही बयां करते है हा उस चांद के साथ हम भी निकलते…

एक बार खुद से पूछो

एक बार खुद से पूछो एक बार खुद से पूछो आइने को देखने बाद तेरे अश्रु धार क्यों बह रहे थे तुम उस चांद के साथ ही निकले थे वह सुबह के तलाश में निकला था तो तुम किसी मंजिल के तलाश में फिर किस मोड़ पर भटक गए तुमने तो ऊंची उड़ान लगाई थी पर हवाओं के बदलती रुख में तुमने अपने को क्यों बदल दिए एक बार …

नासमझ ही सही | दर्द भरी कविता

नासमझ ही सही एक दूजे के जानने बाद भी नासमझ बनना चलो अच्छा है मै नासमझ ही सही मेरा गुरूर कहो या शख्शियत मै समझाऊ तो कैसे समझाऊं चलो अच्छा है तेरी नज़रों में मै खुदगर्ज ही सही तुम समझती हैं हमे दर्द ही नहीं है कैसे कहूं, तुझे सकू नहीं थी मैंने भी नहीं सोया है यकीन कर तेरी यादें मेरी खिड़कि…

Poem on Online classes in hindi

What felling about Online classes Poem ______________________________________________ क्या औचित्य था यहां आने का अपने मन से मै कई बार पूछा न कभी मै किताबो को देखा न जान पाया कोई लेखा जोखा परीक्षा आई राह में तो  हर कदम पर गूगल से पूछा कभी पूछता हू अपने मन से क्या यही औचित्य था यहा आने का च…

नई शुरुआत की जाए

नई शुरुआत की जाए ✍️चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी  लक्ष्यों की बात की जाए होई गलतियों को सुधार की जाए अपने अच्छाई को निखार की जाए क्यों सपने को लाचारी के जंजीर में कसी जाए अपनी बुलंदियों की तस्वीर खींची जाए चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी लक्ष्यों की बात की जाए क्यों हताश होकर निराश बैठा जा…

त्यौहार | Poem on Festival

त्यौहार त्यौहार अपने साथ कितने खुशियां लाता अपने साथ दूर परिजनों को समेटते आता उनको रिश्तों और प्यार की याद दिलाता घर के आंगन में एक नई रौनक लाता त्यौहार अपने साथ कितने खुशियां लाता उत्साह, उमंग की एक लहर लाता नई ऊर्जा का संचार लाता सभी  के  मुख  एक  मुस्कान  लाता दीपावली  छठ  जैसे कई रूप…

चुनाव प्रचार

बिहार चुनाव प्रचार ✍️वे नेता है विभिन्न नकाब में आयेगे वे नेता है विभिन्न पोशाक में आयेगे वे नेता है विभिन्न किरदार में आयेगे वे नेता है विभिन्न कार में भी आयेगे (क्यों आयेगे भाई) चुनाव आया है सत्ते का प्रलोभन खींच लाया है नेता बनने से पहले अपने वादे बताना है और दूसरे हमसाथी पे किच उछालना…

मेरी जिंदगी | छँटती उम्मीदों का गुलाब

छँटती उम्मीदों का गुलाब मेरी जिंदगी ✍ मेरी ज़िंदगी बन गई है एक गुलाब का फूल , चुभा है मेरा काँटा उस माली को जो तोड़ने आए थे फूल। इस मौसम में मेरी कली नहीं बन पाई, मेरी ज़िंदगी बन गई है एक गुलाब का फूल। अब कैसे बनूँ किसी मंच की सजावट का हार, कैसे बनूँ किसी गुलदस्ते का एक हिस्सा, कैसे बनूँ …

तुम्हारी मंजिल

तुम्हारी मंजिल गंतव्य ✍️तेरी जिंदगी में कई अंधेरी राते भी आयेगे तेरे जिंदगी में कई राहें सुनसान भी होगे तू इस अंधेरे और अकेलापन से कभी मत घबराना  हर अंधेरी रात के बाद एक नई सवेरा होगा बुलंद शिखरों पर तुम्हारा एक दिन बसेरा होगा दृढ़ संकल्प के साथ, आगे बढ़ता जाना अपने मंजिल की तरफ बढ…

कैसे करू पहचान

कैसे करू पहचान ✍️कपड़ों से होती है पहचान सूट बुट वाला पाता सम्मान फटे कपड़े वाला नहीं बचा पाता अभिमान अब तो गरीब गरीब को नहीं कर पाता पहचान नकाब के दुनिया में किरदार से रह जाते अनजान कोई चेहरे छुपा लेता बन बेवकूफ और अनजान तो कोई अपनापन दिखा पीछे से खंजरों से कर जाता वार अमरजीत पूछता कैसे …

किसान पर कविता

लाचार किसान ✍️आजकल परिंदे अपनी जान कहा बचा पाते वे उन परिंदे को अपनी नई पंख लगा के उड़ा देते इमारती दुनिया में कच्ची मकान में रहने वाले मजबूरन परिंदे अपनी ही आशियाना खुद तोड़ देते वे निर्वाचन से पहले पूछते उनके अरमानों को दे सब्सिडी की लालच टैक्सो से ही गर्दन दबोच देते मौसमों के मार, ब…

दरिंदे

दरिंदे भले इंसान के जैसा हूं बहू था पर इंसान नहीं था वासना की कामना धर वे एक हैवान था मोहब्बत के लिबास पहने जिस्म के प्यासा था आबरू को लूटने वे दरिंदे हैवानियत का गुलाम था "फिर एक निर्भया जाग गई है दरिंदगी इंसानियत को शर्मसार कर गई है फिर चारो तरफ होगी शोर,निकलेगे कैंडल मार्च अब तो …

मेहनतकश किसान

घड़ी के तीन सुइयां होती है जिसमें एक सुई का नाम सेकंड वाली सुई के नाम से मशहूर है। इस सेकेंड वाली सुई का अपना आस्तित्व तो है लेकिन इसका उल्लेख कहीं नहीं होता।हर कोई कहता है कि दस बजकर दस मिनट हुए है। परन्तु ये कोई नहीं कहता है कि दस बजकर दस मिनट पंद्रह सेकेंड हुए  है। जबकि यह सेकेंड वाली…

टूटते विश्वास | जो छोड़ चला अपनी बुनियाद

टूटते विश्वास ✍टूटते तारों को देख उसने कहा— माँगो कोई मुराद। अरे, उन्हें कोई समझाए ज़रा, जो ख़ुद टूटकर छोड़ चला अपनी बुनियाद। वह पूरा क्या करेगा किसी की मुराद? उसी तरह वह देख एक मृत देह, कहा—माँगो कुछ भी, नहीं है कोई संदेह। उन्हें क्या कहूँ, अमरजीत, जिस लाश में नहीं कोई आत्मा? भला वह क्…

अपनी पहचान हिंदी में अस्वीकार है

हिंदी हूं फिर भी हिंदी में पहचान अस्वीकार है हिंदी भारत की राजभाषा है, फिर भी लोग अपनी पहचान हिंदी के बजाय अंग्रेज़ी में बताकर गर्व महसूस करते हैं। हिंदी को अपनी विचारधारा में बनाए रखने के लिए उसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। आजकल कुछ घरों में यदि कोई बच्चा मेहमानों के सामने हिंदी में …

Copyright (c) 2021 AMARJEET POETRY All Right Reserved