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टूटते विश्वास | जो छोड़ चला अपनी बुनियाद

टूटते विश्वास

amarjeet poetry

✍टूटते तारों को देख उसने कहा—
माँगो कोई मुराद।
अरे, उन्हें कोई समझाए ज़रा,
जो ख़ुद टूटकर छोड़ चला अपनी बुनियाद।

वह पूरा क्या करेगा किसी की मुराद?
उसी तरह वह देख एक मृत देह,
कहा—माँगो कुछ भी,
नहीं है कोई संदेह।

उन्हें क्या कहूँ, अमरजीत,
जिस लाश में नहीं कोई आत्मा?
भला वह क्या बनेगा
किसी का परमात्मा।

- अमरजीत


टूटते तारे

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