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तुम्हारी मंजिल

तुम्हारी मंजिल गंतव्य ✍️तेरी जिंदगी में कई अंधेरी राते भी आयेगे तेरे जिंदगी में कई राहें सुनसान भी होगे तू इस अंधेरे और अकेलापन से कभी मत घबराना  हर अंधेरी रात के बाद एक नई सवेरा होगा बुलंद शिखरों पर तुम्हारा एक दिन बसेरा होगा दृढ़ संकल्प के साथ, आगे बढ़ता जाना अपने मंजिल की तरफ बढ…

मेहनतकश किसान

घड़ी के तीन सुइयां होती है जिसमें एक सुई का नाम सेकंड वाली सुई के नाम से मशहूर है। इस सेकेंड वाली सुई का अपना आस्तित्व तो है लेकिन इसका उल्लेख कहीं नहीं होता।हर कोई कहता है कि दस बजकर दस मिनट हुए है। परन्तु ये कोई नहीं कहता है कि दस बजकर दस मिनट पंद्रह सेकेंड हुए  है। जबकि यह सेकेंड वाली…

बेवफ़ा

बेवफ़ा ✍️मोहब्बत का इजहार करने में देरी क्या की मैंने रकीब से सौदा ही कर ली उसने

उठ मां

उठ मां ✍️अभी तक क्यों सोई है उठ जा अब सुबह हो गई मां मुझसे तू इतना क्यों इतना रूठ गई तू मुझको छोड़कर नहीं जा सकती है सुन तेरी बच्ची तुझे पुकारती है सुना है मां के रूप भगवान साथ रहते है तुझको मुझसे छीन ले वे इतने निष्ठुर नहीं होते है ये सियासत तो से पड़ा है …

हैवानियत

हैवानियत कुछ पल और कर लो सब्र ✍️अब तो कुछ पल और कर लो सब्र लाशे दफन के लिए खोदे जा रहे कब्र भावनाओं का भी नहीं हो रहें कद्र अब तो जनावर भी नहीं बचा पा रहे गर्भ बेजुबानों का यही हालात दिखते है अब तो ईमान भी रद्दी के भाव बिकते है अपनों से कैसी है ये रंजीदा दिल्ली में उठा है ये मुद्दा लेकिन…

कैसी है महामारी

कैसी है महामारी फासला बढ़ा दी हमारी  (कोरोना में न जाने कितने हमसे दूर चले गए ये कविता घर के छोटे छोटे बच्चे का दादा दादी से दूर होने की व्याकुलता को दर्शाती है) ✍️कैसी है ये महामारी फासला बढ़ा दी हमारी अन्तिम समय भी उनको न देख पाए अपने को भी अलविदा न कह पाए जिनसे मिलने के लिए रहत…

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