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नई शुरुआत की जाए

नई शुरुआत की जाए ✍️चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी  लक्ष्यों की बात की जाए होई गलतियों को सुधार की जाए अपने अच्छाई को निखार की जाए क्यों सपने को लाचारी के जंजीर में कसी जाए अपनी बुलंदियों की तस्वीर खींची जाए चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी लक्ष्यों की बात की जाए क्यों हताश होकर निराश बैठा जा…

तुम्हारी मंजिल

तुम्हारी मंजिल गंतव्य ✍️तेरी जिंदगी में कई अंधेरी राते भी आयेगे तेरे जिंदगी में कई राहें सुनसान भी होगे तू इस अंधेरे और अकेलापन से कभी मत घबराना  हर अंधेरी रात के बाद एक नई सवेरा होगा बुलंद शिखरों पर तुम्हारा एक दिन बसेरा होगा दृढ़ संकल्प के साथ, आगे बढ़ता जाना अपने मंजिल की तरफ बढ…

विभन्नता

विभन्नता ✍️ लोग हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर क्यों लड़ते है एक बीज के दो फाड़ है ये बात क्यों नहीं समझते है लोग उन चिड़ियों और जानवरों से भी क्यों नहीं सीख रहे है बल्कि उससब को भी विभिन्न वर्गो और धर्मो में बॉट रखे है मंदिर में दाना चुंगती चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है सुना…

मा-बाप वृद्धाश्रम | बेटा - ये कैसा फ़र्ज़?

"बेटा - ये कैसा फ़र्ज़?" ✍️बेघर हुए माँ-बाप, जिनके आँचल में जीवन-पथ पर चलना सीखा, आज उसी आँचल पर कलंक क्यों बन गया बेटा? जिन उँगलियों को थाम पहला क़दम रखा था, आज उन्हीं काँपती उँगलियों का सहारा बनने से क्यों कतराता है? जिन कंधों पर बैठ सारा मेला घूम आया, आज वही कंधे उसे बोझ क्यो…

माँ तो माँ ही होती है। Poem on maa in hindi

माँ ✍️जब गूँजी पहली किलकारी घर के आँगन में, सब हँसे थे, लेकिन मैं रो रहा था। क्योंकि उस समय मैं माँ से लिपटकर उसका दर्द महसूस कर रहा था। मुझे देख उसने मुझे अपने पास सुलाकर, अपने मुख पर एक मुस्कान लाई। उसके चेहरे को देख मेरे अंदर से भी मुस्कराहट फूटकर बाहर आई। अपने कई दर्दों को वह हँसक…

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