लाचार किसान ✍️आजकल परिंदे अपनी जान कहा बचा पाते वे उन परिंदे को अपनी नई पंख लगा के उड़ा देते इमारती दुनिया में कच्ची मकान में रहने वाले मजबूरन परिंदे अपनी ही आशियाना खुद तोड़ देते वे निर्वाचन से पहले पूछते उनके अरमानों को दे सब्सिडी की लालच टैक्सो से ही गर्दन दबोच देते मौसमों के मार, ब…
घड़ी के तीन सुइयां होती है जिसमें एक सुई का नाम सेकंड वाली सुई के नाम से मशहूर है। इस सेकेंड वाली सुई का अपना आस्तित्व तो है लेकिन इसका उल्लेख कहीं नहीं होता।हर कोई कहता है कि दस बजकर दस मिनट हुए है। परन्तु ये कोई नहीं कहता है कि दस बजकर दस मिनट पंद्रह सेकेंड हुए है। जबकि यह सेकेंड वाली…
उठ मां ✍️अभी तक क्यों सोई है उठ जा अब सुबह हो गई मां मुझसे तू इतना क्यों इतना रूठ गई तू मुझको छोड़कर नहीं जा सकती है सुन तेरी बच्ची तुझे पुकारती है सुना है मां के रूप भगवान साथ रहते है तुझको मुझसे छीन ले वे इतने निष्ठुर नहीं होते है ये सियासत तो से पड़ा है …
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कविता की सूची
- ❇️लाचार किसान
- ❇️दरिंदे
- ❇️मेहनतकश किसान
- ❇️जो छोड़ चला अपनी बुनियाद
- ❇️अपनी पहचान हिंदी में अस्वीकार है
- ❇️कुछ कर लो यार
- ❇️बेवफ़ा
- ❇️पहुंच से दूर वे शिक्षा उनके लिए
- ❇️ बादल भी अश्रु बहाए
- ❇️ बिहार में प्रलय
- ❇️ मां-बाप वृद्धाश्रम
- ❇️ विभिन्नता
- ❇️ सियासत की भूख
- ❇️उठ मां
- ❇️कहाँ हो मोहन
- ❇️कैसी है महामारी
- ❇️जिंदगी के हर जंग जीत जाएंगे
- ❇️दशरथ माझी
- ❇️बिखरते पन्ने
- ❇️माँ
- ❇️मुफलिसी
- ❇️मेरी मजबूरी
- ❇️मैं मजदूर पैसे के सामने मजबूर
- ❇️ये जंजीर
- ❇️शख्स
- ❇️सुनी पड़ गई नदिया
- ❇️हम उनको कहा चुनते है
- ❇️हैवानियत

