नासमझ ही सही एक दूजे के जानने बाद भी नासमझ बनना चलो अच्छा है मै नासमझ ही सही मेरा गुरूर कहो या शख्शियत मै समझाऊ तो कैसे समझाऊं चलो अच्छा है तेरी नज़रों में मै खुदगर्ज ही सही तुम समझती हैं हमे दर्द ही नहीं है कैसे कहूं, तुझे सकू नहीं थी मैंने भी नहीं सोया है यकीन कर तेरी यादें मेरी खिड़कि…
What felling about Online classes Poem ______________________________________________ क्या औचित्य था यहां आने का अपने मन से मै कई बार पूछा न कभी मै किताबो को देखा न जान पाया कोई लेखा जोखा परीक्षा आई राह में तो हर कदम पर गूगल से पूछा कभी पूछता हू अपने मन से क्या यही औचित्य था यहा आने का च…
नई शुरुआत की जाए ✍️चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी लक्ष्यों की बात की जाए होई गलतियों को सुधार की जाए अपने अच्छाई को निखार की जाए क्यों सपने को लाचारी के जंजीर में कसी जाए अपनी बुलंदियों की तस्वीर खींची जाए चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी लक्ष्यों की बात की जाए क्यों हताश होकर निराश बैठा जा…
त्यौहार त्यौहार अपने साथ कितने खुशियां लाता अपने साथ दूर परिजनों को समेटते आता उनको रिश्तों और प्यार की याद दिलाता घर के आंगन में एक नई रौनक लाता त्यौहार अपने साथ कितने खुशियां लाता उत्साह, उमंग की एक लहर लाता नई ऊर्जा का संचार लाता सभी के मुख एक मुस्कान लाता दीपावली छठ जैसे कई रूप…
बिहार चुनाव प्रचार ✍️वे नेता है विभिन्न नकाब में आयेगे वे नेता है विभिन्न पोशाक में आयेगे वे नेता है विभिन्न किरदार में आयेगे वे नेता है विभिन्न कार में भी आयेगे (क्यों आयेगे भाई) चुनाव आया है सत्ते का प्रलोभन खींच लाया है नेता बनने से पहले अपने वादे बताना है और दूसरे हमसाथी पे किच उछालना…
छँटती उम्मीदों का गुलाब मेरी जिंदगी ✍ मेरी ज़िंदगी बन गई है एक गुलाब का फूल , चुभा है मेरा काँटा उस माली को जो तोड़ने आए थे फूल। इस मौसम में मेरी कली नहीं बन पाई, मेरी ज़िंदगी बन गई है एक गुलाब का फूल। अब कैसे बनूँ किसी मंच की सजावट का हार, कैसे बनूँ किसी गुलदस्ते का एक हिस्सा, कैसे बनूँ …
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कविता की सूची
- ❇️लाचार किसान
- ❇️दरिंदे
- ❇️मेहनतकश किसान
- ❇️जो छोड़ चला अपनी बुनियाद
- ❇️अपनी पहचान हिंदी में अस्वीकार है
- ❇️कुछ कर लो यार
- ❇️बेवफ़ा
- ❇️पहुंच से दूर वे शिक्षा उनके लिए
- ❇️ बादल भी अश्रु बहाए
- ❇️ बिहार में प्रलय
- ❇️ मां-बाप वृद्धाश्रम
- ❇️ विभिन्नता
- ❇️ सियासत की भूख
- ❇️उठ मां
- ❇️कहाँ हो मोहन
- ❇️कैसी है महामारी
- ❇️जिंदगी के हर जंग जीत जाएंगे
- ❇️दशरथ माझी
- ❇️बिखरते पन्ने
- ❇️माँ
- ❇️मुफलिसी
- ❇️मेरी मजबूरी
- ❇️मैं मजदूर पैसे के सामने मजबूर
- ❇️ये जंजीर
- ❇️शख्स
- ❇️सुनी पड़ गई नदिया
- ❇️हम उनको कहा चुनते है
- ❇️हैवानियत

