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जुलाई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बिहार में प्रलय

कितने आपदाएं से गुजरेगा  बिहार बिहार ✍️कितने-कितने आपदाएं से गुजरेगा बिहार कभी सुख़ार  तो कभी बाढ़  कभी लू  तो कभी चमकी बुखार  कभी वज्रपात तो कभी आकाल किस तंद्रा या निद्रा में है सरकार कोरोना ने सवाल किया ही अब कर रही है बाढ़ न जाने कहा नेत्र मुद बैठी है सरकार न कोई जनता से सुध ना कोई प्र…

Shayari

कारगिल के विजय दिवस पर "मर कर भी वतन कि उल्फत नहीं निकलेगी जरा इस मिट्टी से तिलक लगा लो

हम उनको कहा चुनते है

हम उनको कहा चुनते है ✍️ एक वोट के लिए वे कितने चेहरे पर नकाब पहनेंगे काम निकल जाने के बाद "कौन है आप" जैसे सवाल करेगें फिर जन ऐसे लोगो को मतदान क्यों देती  जिसकी सरकार सिर्फ अपनी उल्लू सीधा करती जो चुनावो में हाथ जोड़े आपके दरवाजे पर खड़े रहते हैं कल वे केवल अपने घर भरते हैं आए …

मेरी मजबूरी

क्या करू साहब Lockdownमें पुलिस की सख्ती और लोग की मजबूरी                                  ✍️समझता हूं घर में रहना कितना जरूरी है विवश होकर बाहर निकालना मेरी मजबूरी है साहब,इस पापी पेट का सवाल है मेरी आय का श्रोत रोज की मजदूरी है तृष्णाए भी नहीं मेरी दैनिक जरूरत में पर ना कुछ जमा है मेरी…

मुफलिसी

मुफलिसी पिता को गोद में ले रोता बच्चा मुफलिसी   पर क्या लिखूं मै अकसर नुकसान मुफलिसियो का होता है उस बच्चे के गोद में उसका बाप नहीं उस देश की मरी आत्मा पर वह बच्चा रोता है कैसी सिस्टम हो गई है हमारी जब कोई किसान कीटनाशक के दावा पी लेता है कोई भू माफिया सरकारी जमीन को किराए पर दे रहा तो सज…

दशरथ माझी

दशरथ मांझी के दृढ़ दशरथ मझी के द्वारा बनाया गया सड़क ✍️आए जिंदगी में तूफ़ानों में साहिल छोड़ रचा इतिहास वह, इन पहाड़ों को तोड़ जिनके आगे पत्थर भी बिखेर गया जो अपनी मोहब्बत के नई छाप छोड़ गया भले वह आर्थिक से जर्जर था पर उसके दृढ़ बड़े कमाल था इश्क के लहरों के अद्भुत था माझी कोई नहीं वह है…

Hindi shayari

जब मिलने के तमन्ना थी तब उनके रास्ते में कई मोड़ आई सवालात करता हूं खुदा तुझसे अब मेरे मोड़ क्यों बनती है परछाई                        -अमरजीत                      --------******--------- प्यार की निशानी है ताजमहल तो क्यों है वह एक कब्रस्थल        -अमरजीत _____*****_____ अपनी  मोहब्बत …

शख्स

शख्स शख़्स ✍️उसकी नवाज़िश में भी कोई साजिश लगती है ये बदलाव में उसकी कोई निजी खाहिश लगती है वरना जब माज़ी में आई थी खिजां तब उसको कोई मदद के लिए नहीं सुझा कर खिदमत अपने कामों कि सिफ़ारिश करता है बारूद तिलियो पर थी बदनाम माचिस को करता है वह शख्स अपने गलतियों पर झूठ के पर्दा …

विभन्नता

विभन्नता ✍️ लोग हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर क्यों लड़ते है एक बीज के दो फाड़ है ये बात क्यों नहीं समझते है लोग उन चिड़ियों और जानवरों से भी क्यों नहीं सीख रहे है बल्कि उससब को भी विभिन्न वर्गो और धर्मो में बॉट रखे है मंदिर में दाना चुंगती चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है सुना…

ये जंजीर

ये जंजीर Lockdown ✍️कहां गुम हो गई इस खाली मयान कि शमशीर क्या कभी नहीं टूटेगी ये जंजीर अब ये मयान भी कर रही इल्तिज़ा क्या तेरे इल्म में नहीं कोई उपाय सूझा बहुत हुआ जकड़न में जीना किसी को अब बेवक्त नहीं है सोना इंसानों पर कैसी आन पड़ी ये मजबूरियां इस बेड़ियों ने बढ़ा दी अ…

बादल भी अश्रु बहाए

बादल भी अश्रु बहाए ✍️ उन वीरों की शहादत पर ये बादल भी अश्रु बहाए शर्म नहीं आती उन सियासती पिदो को जो इस बात को भी राजनीति में घसीट लाए बड़े बनते हैं दानवीर लेकिन अंदर बह रही बेईमानी कि नीर अरे दो मुखटो वालों एक नौकरी और कुछ मुआवजे के वादे के आलावा बोलो क्या दे पाए अरे इस घ…

सियासात की भूख

सियासत की भूख ✍️आज फिर सियासत दहक उठी उसमें पड़ी आहुतियां जल उठी सभी ने तान लिए है पर्तांचा सियासत में निब रखने की बड़ी है उत्कंठा देखना कैसे करेंगे कामप्रवेदन जनता से कैसे करेंगे निवेदन अपनी फसल के लिए चुनेंगे सिर्फ भूमि कृष्ट वे इस काम में है बड़े उत्कृष्ट हे राष्ट्र …

मा-बाप वृद्धाश्रम | बेटा - ये कैसा फ़र्ज़?

"बेटा - ये कैसा फ़र्ज़?" ✍️बेघर हुए माँ-बाप, जिनके आँचल में जीवन-पथ पर चलना सीखा, आज उसी आँचल पर कलंक क्यों बन गया बेटा? जिन उँगलियों को थाम पहला क़दम रखा था, आज उन्हीं काँपती उँगलियों का सहारा बनने से क्यों कतराता है? जिन कंधों पर बैठ सारा मेला घूम आया, आज वही कंधे उसे बोझ क्यो…

माँ तो माँ ही होती है। Poem on maa in hindi

माँ ✍️जब गूँजी पहली किलकारी घर के आँगन में, सब हँसे थे, लेकिन मैं रो रहा था। क्योंकि उस समय मैं माँ से लिपटकर उसका दर्द महसूस कर रहा था। मुझे देख उसने मुझे अपने पास सुलाकर, अपने मुख पर एक मुस्कान लाई। उसके चेहरे को देख मेरे अंदर से भी मुस्कराहट फूटकर बाहर आई। अपने कई दर्दों को वह हँसक…

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