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Poem on Online classes in hindi

What felling about Online classes Poem ______________________________________________ क्या औचित्य था यहां आने का अपने मन से मै कई बार पूछा न कभी मै किताबो को देखा न जान पाया कोई लेखा जोखा परीक्षा आई राह में तो  हर कदम पर गूगल से पूछा कभी पूछता हू अपने मन से क्या यही औचित्य था यहा आने का च…

नई शुरुआत की जाए

नई शुरुआत की जाए ✍️चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी  लक्ष्यों की बात की जाए होई गलतियों को सुधार की जाए अपने अच्छाई को निखार की जाए क्यों सपने को लाचारी के जंजीर में कसी जाए अपनी बुलंदियों की तस्वीर खींची जाए चलिए नई शुरुआत की जाए अपनी लक्ष्यों की बात की जाए क्यों हताश होकर निराश बैठा जा…

त्यौहार | Poem on Festival

त्यौहार त्यौहार अपने साथ कितने खुशियां लाता अपने साथ दूर परिजनों को समेटते आता उनको रिश्तों और प्यार की याद दिलाता घर के आंगन में एक नई रौनक लाता त्यौहार अपने साथ कितने खुशियां लाता उत्साह, उमंग की एक लहर लाता नई ऊर्जा का संचार लाता सभी  के  मुख  एक  मुस्कान  लाता दीपावली  छठ  जैसे कई रूप…

चुनाव प्रचार

बिहार चुनाव प्रचार ✍️वे नेता है विभिन्न नकाब में आयेगे वे नेता है विभिन्न पोशाक में आयेगे वे नेता है विभिन्न किरदार में आयेगे वे नेता है विभिन्न कार में भी आयेगे (क्यों आयेगे भाई) चुनाव आया है सत्ते का प्रलोभन खींच लाया है नेता बनने से पहले अपने वादे बताना है और दूसरे हमसाथी पे किच उछालना…

मेरी जिंदगी | छँटती उम्मीदों का गुलाब

छँटती उम्मीदों का गुलाब मेरी जिंदगी ✍ मेरी ज़िंदगी बन गई है एक गुलाब का फूल , चुभा है मेरा काँटा उस माली को जो तोड़ने आए थे फूल। इस मौसम में मेरी कली नहीं बन पाई, मेरी ज़िंदगी बन गई है एक गुलाब का फूल। अब कैसे बनूँ किसी मंच की सजावट का हार, कैसे बनूँ किसी गुलदस्ते का एक हिस्सा, कैसे बनूँ …

तुम्हारी मंजिल

तुम्हारी मंजिल गंतव्य ✍️तेरी जिंदगी में कई अंधेरी राते भी आयेगे तेरे जिंदगी में कई राहें सुनसान भी होगे तू इस अंधेरे और अकेलापन से कभी मत घबराना  हर अंधेरी रात के बाद एक नई सवेरा होगा बुलंद शिखरों पर तुम्हारा एक दिन बसेरा होगा दृढ़ संकल्प के साथ, आगे बढ़ता जाना अपने मंजिल की तरफ बढ…

कैसे करू पहचान

कैसे करू पहचान ✍️कपड़ों से होती है पहचान सूट बुट वाला पाता सम्मान फटे कपड़े वाला नहीं बचा पाता अभिमान अब तो गरीब गरीब को नहीं कर पाता पहचान नकाब के दुनिया में किरदार से रह जाते अनजान कोई चेहरे छुपा लेता बन बेवकूफ और अनजान तो कोई अपनापन दिखा पीछे से खंजरों से कर जाता वार अमरजीत पूछता कैसे …

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