2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
अल्फ़ाज़ हैं लेकिन खामोश है किताब की तरह है उनकी कहानी, अल्फ़ाज़ हैं लेकिन खामोश है। हर पन्ने पर दर्द की स्याही है, मगर हर लफ़्ज़ में सब्र की जोश है। न जाने ज़िंदगी में कितने पन्ने उन्होंने ख़ुद ही सवारे, निखारे हैं, पर आज बाहर चारपाई पर बैठे भीड़ में रहकर भी तन्हा हारे हैं। ख़ैरियत के वा…
Trending now
माँ तो माँ ही होती है। Poem on maa in hindi
माँ ✍️जब गूँजी पहली किलकारी घर के आँगन में, सब हँसे थे, लेकिन मैं रो रहा था। क्योंकि …
बिहार में प्रलय
कितने आपदाएं से गुजरेगा बिहार बिहार ✍️कितने-कितने आपदाएं से गुजरेगा बिहार कभी सुख़ार तो…
कैसे करू पहचान
कैसे करू पहचान ✍️कपड़ों से होती है पहचान सूट बुट वाला पाता सम्मान फटे कपड़े वाला नहीं बचा…
बिखरते पन्ने | आख़िर कौन ज़िम्मेदार है?
बिखरते पन्ने| आख़िर कौन ज़िम्मेदार है? ✍️ ये छिटककर बिखरते पन्ने क्या अकेले पूरे कर पाएँग…
मेरी मजबूरी
क्या करू साहब Lockdownमें पुलिस की सख्ती और लोग की मजबूरी …
कविता की सूची
- ❇️लाचार किसान
- ❇️दरिंदे
- ❇️मेहनतकश किसान
- ❇️जो छोड़ चला अपनी बुनियाद
- ❇️अपनी पहचान हिंदी में अस्वीकार है
- ❇️कुछ कर लो यार
- ❇️बेवफ़ा
- ❇️पहुंच से दूर वे शिक्षा उनके लिए
- ❇️ बादल भी अश्रु बहाए
- ❇️ बिहार में प्रलय
- ❇️ मां-बाप वृद्धाश्रम
- ❇️ विभिन्नता
- ❇️ सियासत की भूख
- ❇️उठ मां
- ❇️कहाँ हो मोहन
- ❇️कैसी है महामारी
- ❇️जिंदगी के हर जंग जीत जाएंगे
- ❇️दशरथ माझी
- ❇️बिखरते पन्ने
- ❇️माँ
- ❇️मुफलिसी
- ❇️मेरी मजबूरी
- ❇️मैं मजदूर पैसे के सामने मजबूर
- ❇️ये जंजीर
- ❇️शख्स
- ❇️सुनी पड़ गई नदिया
- ❇️हम उनको कहा चुनते है
- ❇️हैवानियत

