रफ्ता रफ्ता ही कोई होशियारी नहीं, होशियार होना, मुश्किल होता है जिम्मेदार बनना। माँ-बाप की आँखों में देखें तो मुश्किल लगता है उनकी परेशानियों का हिस्सेदार बनना। यूँ तो आसान है नादान बनना, मुश्किल है जिम्मेदार बनना। परिस्थितियाँ भी चाहती होंगी जग में एक बदलाव लाना, हमारी इच्छाएँ बाज़ की तर…